Wednesday, 11 May 2016

सेक्‍स के मामले में तुम 'ऐसे' तो नहीं हो?

By on 04:05
यह सिर्फ कोई सेक्‍स सर्वे नहीं हुआ है. इससे हिंदुस्‍तानी मर्द-औरतों की निजी जिंदगी का ऐसा चेहरा सामने आया है, जिसके मापदंड आपको चौंका देंगे...

मेरे प्यारे पाखंडी हिंदुस्तानी,
तुम जो बसों और मेट्रो में पीछे दिखने वाले शीशों में अपने होंठों के उभार को सहेजते हुए अपने चेहरों पर प्रेम के बाद की चमक के साथ नजर आते हो. तुम जो चट्टान सरीखे मजबूत कंधों और शानदार ऐब्स के लिए जिम में भीड़ लगा देते हो, वही ऐब्स जिन्हें देखकर नए से नए ढंग से अपनी लटें संवारने के लिए सैलूनों में उमड़ पड़ने वाली तुम्हारी संगिनियां उत्तेजित हो उठती हैं. 
तुम जो जिवामी, Masalatoys.com और ThatsPersonal.com सरीखे ई-रिटेलरों के मोबाइल ऐप्स के जरिए गुपचुप फड़कते हुए अंतर्वस्त्रों का ऑर्डर देते हैं. तुम सेक्स के लिए रिश्ते तोड़ देते हो, चरमसुख की आकांक्षा करते हो और कुछ ज्यादा ही जोशो-खरोश पर भी तुम्हें ऐतराज नहीं होता. तुम छुपे रुस्तम हो. तुम जानते हो कि तुम कौन हो. तुम्हारी तादाद भी अच्छी-खासी है.
तुम गुवाहाटी और पटना से लेकर मुंबई तक फैले हो, जिनमें से 75 फीसदी मानते हैं कि रिश्ते में सेक्स बेहद अहम है, तुम में से 64 फीसदी अपनी सेक्स की इच्छा और ताकत को बहुत ऊंचा आंकते हो, तुम में से 71 फीसदी बिस्तर में अपने साथी के प्रदर्शन को 'अच्छा' के दर्जे में रखते हो और तुममें से 55 फीसदी बिस्तर में खिलदड़ और चुलबुलेपन से भरे हो.
तुम अपनी मध्यवर्गीय नैतिकता की ऊंची मीनारों में छिप जाते हो और सेंसर बोर्ड के मुखिया पहलाज निहलानी के फरमानों को चुपचाप कुबूल कर लेते हो कि कितनी उत्तेजना और गुदगुदाहट तुम्हारे लिए बहुत ज्यादा है. तुम्हारी वजह से जेम्स बॉन्ड हमारे सिनेमाहॉलों में मोनिका बेलूची को चूम नहीं सका. इसका ठीकरा क्या तुम उसके सिर पर फोड़ सकते हो? तुम जो मस्तीजादे फिल्म के प्रोमोज पर चीं-चीं करने लगते हो, लेकिन उस 100 करोड़ रु. की फिल्म ग्रैंड मस्ती के साथ तुमने अश्लील कॉमेडी के जुंए को बॉक्स ऑफिस पर जायज बना दिया. तुम जो ऑल इंडिया बकचोद रोस्ट के सेक्सी इशारों और तंज से भरे शो में शुरू से आखिर तक बैठे रहने के लिए दीपिका पादुकोण को 'बेशर्म' कहते हो, लेकिन पूर्व पोर्न स्टार सनी लियोनी को 2015 में लगातार दूसरे साल गूगल पर सबसे ज्यादा सर्च की जाने वाली सेलेब्रिटी बना देते हो.
हिंदुस्तानी सपने के सिनेमाई संस्करण में शाहरुख खान और काजोल 25 साल बाद दिलवाले में दोबारा मिलते हैं और फिर भी एक दूसरे को चूमते नहीं हैं. ऐश्वर्य राय बच्चन अब भी रणबीर कपूर के साथ एक चुंबन दृश्य फिल्माने को राजी नहीं होतीं. मगर हर हिंदुस्तानी चीज से मुहब्बत करने वाला जो भारतीय तबका शहरी जिंदगी की सच्ची सांस्कृतिक क्रांति की पहचान बन गया है, वह भी कुबूल करता है कि उसने ऑस्कर में जीत की दावेदार दो औरतों के इश्क पर बनी ड्रामा फिल्म कैरोल का लंबा संस्करण पहले ही डाउनलोड करके देख लिया है. मानो हिंदुस्तानी फिल्मों का कोई सच्चा आशिक तो ऐसा नहीं करता. और बांद्रा के कांग्रेसी स्टीफन नोरोन्हा ने पिछले साल भले ही 'लिमिट्स विदइन' के गुमनाम चुंबन वाले पोस्टर्स फाड़ डाले हों, मगर तुम भी तो खुद अपने हाथों से उसूलों की किताब की साफ-साफ धज्जियां उड़ा रहे हो.
बेवफाई का मौका देने वाली साइट AshleyMadison.com  पर साइन-इन करने वालों में भारत शिखर पर है और शादी तथा डेटिंग साइटों पर युवक-युवतियां किसी भी गोत्र पर बात नहीं कर रहे हैं. यहां तक कि तुम में से 36 फीसदी ने कौमार्य या कुंआरेपन का लबादा भी उतार फेंका है, जिसे तुमने इज्जत के ढोंग की तरह पहन रखा था और तुम्हें अब इस बात की परवाह नहीं है कि तुम्हारी संगिनियां कुंआरी हैं या नहीं (28.3 फीसदी औरतें असल में नहीं हैं).
तुम खुद अपनी तरफ देखो, जो सेक्स के पहले तजुर्बे को आनंद के तजुर्बे की शुरुआत भर मानते हो. काम में मसरूफ होने के नाते तुमने जो बेशकीमती औसत अपने लिए तय किया है, वह हफ्ते में कुछेक बार 30 मिनट का सेक्स है, जिसे तुममें से 37.7 फीसदी चरम सुख को परम आनंद बताते हो.
तृप्त यौन जिंदगी का नया बुनियादी फलसफा है कभी संतुष्ट न होना, और तुम सब इंटरनेट, टेलीविजन और फिल्मों में और ज्यादा विकल्पों की तलाश में निकल पड़े हो. तुममें से 40.3 फीसदी पोर्न देखते हो, मगर मेट्रो शहरों में बेंगलूरू ही है, जहां ऐसे लोगों की तादाद सबसे ज्यादा 20.9 फीसदी है. सेक्स के दौरान आवाजें निकालने ने तो राष्ट्रीय शक्ल अख्तियार कर ली है, जब तुममें से 38 फीसदी आवाजों से अपने साथी को इशारा करते हो कि तुम्हें उत्तेजित करने का सबसे अच्छा तरीका क्या है और 57 फीसदी पारंपरिक लाड़-प्यार को तरजीह देते हो, जबकि 4 फीसदी कृत्रिम चीजों का सहारा लेते हो. फिर भी तुममें से ज्यादातर जज्बाती हैं, 34 फीसदी जज्बातों से उत्तेजित होते हैं (हां, तुम, कमजोर दिल वाले भोंदू, तुम).
तुम्हारे सफेद और स्याह पक्षों में भी अब बेहतर तालमेल है, क्योंकि न केवल औरतें पहल कर रही हैं और आदमी बात कर रहे हैं, बल्कि दोनों एक दूसरे को भरपूर सहारा भी दे रहे हैं. सेक्स की वजह से एक दूसरे से दूर रहने वाले जोड़ों में से 74 फीसदी में प्यार बना रहता है. इसे कारगर बनाने के लिए तुम खुद अपने कायदे भी गढ़ रहे हो, प्रदीप और नेहा नैयर की तरह. बेंगलूरू के इस जोड़े को रिश्ते में बंधे चार साल हुए हैं.इतने साल तक सर्वे में शामिल एक चौथाई लोग शादी की सामाजिक स्वीकृति के बगैर आसानी से एक दूसरे के साथ रह रहे थे. तुम्हारे लिए यह अच्छा ही है कि तुम वह सब कर रहे हो, जो अपने संग-साथ को बनाए रखने के लिए जरूरी है और तुमने उसूलों की किताबों को ताक पर रख दिया है.
शुक्रिया अदा करें सोशल मीडिया का और टिंडर तथा ट्रूली मैडली डीपली सरीखे ऐप्स का भी कि जिन्होंने रिश्ते कायम करने को आसान और अनौपचारिक बना दिया है—तुममें से 17.2 फीसदी उन लोगों के साथ मौज-मस्ती कर रहे हो, जिन्हें तुम जानते भी नहीं. 67 फीसदी के साथ हैदराबाद इस फेहरिस्त में अव्वल है. और तुम घर चलाने वाली 3.8 फीसदी गृहणियों, तुमने अपने सदविवाहिता घर के पके खाने और बेदाग गृहस्थी की आड़ में सेक्स के लिए रकम भी चुकाई है.
तुमने प्यार और सेक्स में फर्क करने की बेहद परिपक्व काबिलियत भी हासिल कर ली है, इसलिए सेक्स करना और जरूरतें पूरी करना दो पूरी तरह अलग-अलग बातें हैं—32.1 फीसदी आदमी और 22.9 फीसदी औरतें यह फर्क कर पाती हैं और इन दोनों में कोई घालमेल नहीं करतीं. तकरीबन 20 फीसदी हिंदुस्तान ने कहा है कि उन्हें इससे कोई दिक्कत नहीं है कि उनका पार्टनर रिश्ते से बाहर जाकर कुछ तलाश करता है.
यह वह हकीकत है, जिसे मुंबई में रहने वाली सोनाली गुप्ता जैसी मनोवैज्ञानिक एक छोटी-सी तादाद में जोड़ों के बीच बढ़ती आपसी रजामंदी का समझौता कहती हैं. वे बताती हैं, ''अगर बेवफाई आज रिश्ते टूटने की वजह है भी तो यह रिश्तों के टूटने की अकेली वजह नहीं है, बल्कि बहुत सारी बातों का नतीजा ज्यादा है. कुछ जोड़ों को उनके रिश्ते के भीतर प्रयोग करना ठीक लगता है.''
लिहाजा अगली बार जब आप बाहों में बाहें डालकर लिपटने की हिंदुस्तान की फितरत को बेसुरा और भारतीय संस्कृति के खिलाफ करार दें, तब याद रखें कि 81 फीसदी औरतें और 75 फीसदी पुरुष अपने साथी के साथ ही प्यार का तजुर्बा करते हैं और सिर्फ 7.5 फीसदी धोखा देते हैं. ये कोई छोटी गिनतियां नहीं हैं, ये खुशगवार लोगों का पूरा विशाल हिस्सा है. सो मुंबई के स्कूल के प्रिंसिपल भले भुनभुनाते रहें कि उन्हें क्लास में निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाने पड़ते हैं, पर यह सब ऊपर का ही असर है, जो संतुष्ट पुरुषों और रजामंद औरतों से, अपने साथी के साथ लुत्फ उठाते 56 फीसदी बड़े लोगों से 54 फीसदी जवान वयस्कों में आ रहा है.
और तुम, सेंसरशिप लगाने वालो, नाक-भौं सिकोडऩे वालो, तुम जो शिकायतें करते हो कि ये नौजवान इंटरनेट और टीवी और 35 एमएम के बड़े पर्दे के एक कामुक चुंबन के जरिए आने वाले बाहरी असर से नापाक हो रहे हैं, और कभी इस पर, कभी उस पर पाबंदी की लगातार रट लगाए रहते हो, याद रखो कि तुम अल्पमत में हो, तुममें से 28 फीसदी शादियों से ऊब चुके हो, 16.6 फीसदी अपनी सेक्स जिंदगी से नाखुश हो, तुममें से 43.4 फीसदी पुणे में और 38 फीसदी हैदराबाद में हो, जो सेक्स के बाद अपने बिस्तर पर छत को निहारते हुए लेटे रहते हो. तुम हमारे ऊपर एक मेहरबानी करो, एक कंडोम उठाओ और हिंदुस्तान की इन रंगरेलियों में में शामिल हो जाओ.

Note This News From: http://www.ichowk.in/society/exposing-pschy-of-indian-men-women-sex-survey-2016-india-today-porn-masturbation-fantacy/story/1/2604.html

Tuesday, 10 May 2016

रक्षा मंत्री मनोहर परीकर ने ऐसा धोया कि उठकर भागी सोनिया गाँधी, देखिये विडियो

By on 03:56
कल संसद मैं केंद्रीय रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने अगस्ता वेस्टलैंड मामले की पोल खोलकर रख दी और लोकसभा में कांग्रेस पार्टी की अध्यक्ष सोनिया गाँधी और सभी कांग्रेस सांसदों को शर्म से पानी पानी कर दिया। रक्षा मंत्री के भाषण से सोनिया गाँधी और कांग्रेस सांसद इतना शर्मशार हो गए कि हंगामा करके लोकसभा से भाग गए, हालाँकि मनोहर पर्रिकर ने देश के सामने अपनी बात पूरी की।

उन्होंने कहा कि मै यकीन के साथ कह सकता कि CBI और ED अपना काम करेंगी और जो काम हम बोफोर्स मामले में नहीं कर पाए वह काम हम अगस्ता वेस्टलैंड मामले में कर पाएंगे और घूस लेने वाले सभी आरोपियों को उनके स्थान पर पहुंचाएंगे।
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मनोहर पर्रिकर ने कहा कि एसपी त्यागी और डॉक्टर खेतान जिनसे CBI पूछताछ कर रही है, उन्हें इस घोटाले की छोटी मछलियाँ कह सकते हैं, इन लोगों ने केवल बहती गंगा में हाथ धोया है लेकिन अभी CBI यह जांच कर रही है कि यह गंगा गयी किधर है। ऐसा बोलकर मनोहर पर्रिकर ने सोनिया गाँधी और अहमद पटेल पर निशाना साधा था जिन्हें इस मामले की बड़ी मछलियाँ कहा जा रहा है और घोटाले की गंगा यहीं पर जाकर ख़त्म हो रही है।
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उन्होंने कहा कि सीलिंग हाईट 1.8 मीटर UPA सरकार ने की, फील्ड ट्रायल भारत से बाहर UPA ने करवाया जो कि भारत के हिसाब से बराबर नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि हेलीकाप्टर में भी कई खामियां हैं, अगर यह 30 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जाएगा तो कोई सामान नही उठा पाएगा, यह मामला तब सामने आया जब प्रेसिडेंट को पोखरण में जाना था और हेलीकाप्टर खराब हो गया उसके बाद कंपनी पर FIR भी नहीं की गयी।
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उन्होंने कहा कि इन्होने पैसे बनाने के चक्कर में देश के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की जान खतरे में डाल दी। अब क्या हम देश की भी सुरक्षा खतरे में डाल दें इसलिए हमने आप लोगों ने जो कॉन्ट्रैक्ट दिया था उसे जारी रखा ताकि उनसे अनुबंधित पार्ट्स हमें मिल सकें और हमारी नेवी और एयरफोर्स की सुरक्षा खतरे में ना पड़े। लेकिन हमने उसके बाद कंपनी से कोई भी कॉन्ट्रैक्ट साइन नहीं किया और उन्हें ब्लैकलिस्ट कर दिया।
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उन्होंने कहा कि इस डील में भ्रष्टाचार हुआ है और इनके रक्षा मंत्री ने भी इसे माना है यह भ्रष्टाचार कांग्रेस वालों ने किया है।
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उन्होंने कांग्रेस की हंसी उड़ाते हुए कहा कि ये लकी हैं कि इनके पास इटैलियन ट्रांसलेटर हैं ,लेकिन हमारे पास इटली का कोई ट्रांसलेटर नहीं है लेकिन हमारी सरकार जल्द ही इटैलियन ट्रांसलेटर को हायर करेगी और इस मामले की गहराई से जांच करेगी।
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उन्होंने बताया कि इन लोगों ने बेचारे एंटोनी के हाथ बाँध रखे थे लेकिन जब एंटोनी ने देखा कि वे इस मामले में फंस सकते हैं तो उन्होंने यह मामला 2012 में CBI के पास भेज दिया लेकिन उसके बाद भी 8 महीने तक CBI ने फ़ाइल को अपने पास रोके रखा जबकि उन्हें तुरंत ही यह मामला ED के पास ट्रान्सफर करना था।
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उन्होंने बताया कि जब कांग्रेस को लगा कि देश में मोदी सरकार का आना तय है तो उन्होंने एयरपोर्ट ऑफिस 2, जिस कमरे में घोटाले से जुडी सभी फाइलें रखी गयी थीं उस कमरे में आग लगा दीं लेकिन उनका मकसद कामयाब नहीं हुआ और मामले से जुडी तीन फाइलें जलने से बच गयीं।
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उन्होंने कहा कि ऐसा इसलिए हुआ क्यों की जिस अफसर के पास यह फाइलें थी उसने मामले की संवेदलशीलता को देखते हुए तीनों फाइलें एक सीक्रेट दराज में लॉक कर दी थीं जिसकी वजह से यह फाइलें जलने से बच गयीं।

Note This News From : http://newstrend.in/manohar-parikar-blasts-in-parliament/

Monday, 9 May 2016

महाराणा प्रताप का इतिहास

By on 20:25

पूरा नाम – महाराणा प्रताप
जन्म   –  9  मे, 1540
जन्मस्थान – कुम्भलगढ़ दुर्ग
पिता  – राणा उदय सिंह.
माता – महाराणी जयवंता कँवर
विवाह Wives of Maharana Pratap – उन्होंने 11 शादियाँ की थी – महारानी अजब्धे पंवार, अमरबाई राठौर, शहमति बाई हाडा, लखाबाई, जसोबाई चौहान और 6 पत्निया.
संतान Son of Maharana Pratap  – अमर सिंह, भगवान दास और 17 पुत्र

महाराणा प्रताप का इतिहास – Maharana Pratap History In Hindi

बचपन से ही महाराणा प्रताप साहसी, वीर, स्वाभिमानी एवं स्वतंत्रताप्रिय थे. सन 1572 में मेवाड़ के सिंहासन पर बैठते ही उन्हें अभूतपूर्व संकोटो का सामना करना पड़ा, मगर धैर्य और साहस के साथ उन्होंने हर विपत्ति का सामना किया. मुगलों की विराट सेना से हल्दी घाटी में उनका भरी युद्ध हुआ. वहा उन्होंने जो पराक्रम दिखाया, वह भारतीय इतिहास में अद्वितीय है, उन्होंने अपने पूर्वजों की मान – मर्यादा की रक्षा की और प्रण किया की जब तक अपने राज्य को मुक्त नहीं करवा लेंगे, तब तक राज्य – सुख का उपभोग नहीं करेंगे. तब से वह भूमी पर सोने लगे, वह अरावली के जंगलो में कष्ट सहते हुए भटकते रहे, परन्तु उन्होंने मुग़ल सम्राट की अधीनता स्वीकार नहीं की. उन्होंने अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना जीवन होम कर दिया.

यद्दपि महाराणा प्रताप शक्तिशाली मुगलों को पराजित नहीं कर पाए, पर उन्होंने वीरता का जो आदर्श प्रस्तुत किया, वह अद्वितीय है. उन्होंने जिन परिस्थितियों में संघर्ष किया,वे वास्तव में जटिल थी, पर उन्होंने हार नहीं मानी. यदि राजपूतो को भारतीय इतिहास में सम्मानपूर्ण स्थान मिल सका तो इसका श्रेय मुख्यत: राणा प्रताप को ही जाता है. उन्होंने अपनी मातृभूमि को न तो परतंत्र होने दिया न ही कलंकित. विशाल मुग़ल सेनाओ को उन्होंने लोहे के चने चबाने पर विवश कर दिया था. मुगल सम्राट अकबर उनके राज्य को जीतकर अपने साम्राज्य में मिलाना चाहते थे, किन्तु राणा प्रताप ने ऐसा नहीं होने दिया और आजीवन संघर्ष किया.
मुग़ल साम्राज्य का सूर्य तो डूब गया, किन्तु राणा प्रताप की गौरवगाथा आज भी गायी जाती है. कर्नल टॉड सहित कई विदेशी इतिहासकारो ने उनके स्वाभिमान की प्रशंसा की है. कहा जाता है की राणा के देहांत की खबर पाकर स्वयं अकबरकी आखें डबडबा आई थीं.
महाराणा प्रताप भारतीय इतिहास के एक अत्यंत गौरवशाली पात्र है. उनके त्याग, शौर्य और राष्ट्रभक्ति की तुलना किसी से नहीं की जा सकती. वह आज भारत में शौर्य, साहस और स्वाभिमान का प्रतीक बन गये है.
मृत्यु (Death) – 57 साल की उम्र में वह स्वर्ग सिधार गये.
Maharana Pratap Horse :- चेतक  Chetak
चेतक की विरता पर –
रण बीच चोकड़ी भर-भर कर चेतक बन गया निराला था
राणाप्रताप के घोड़े से पड़ गया हवा का पाला था,
जो तनिक हवा से बाग़ हिली लेकर सवार उड़ जाता था
राणा की पुतली फिरी नहीं,तब तक चेतक मुड जाता था.

Sunday, 8 May 2016

प्यार में पागल आशिकों का इलाज होता है यहां...

By on 20:01

इस मंदिर में उतारा जाता है सिर से इश्क का भूत, प्यार में पागल लोगों को लाया जाता है यहां


भारत विविधताओं का देश है। यह बात यहां के मंदिर, देवालय और तीर्थस्थानों पर पर भी लागू होती है। यही कारण है यहां मिसाइल मंदिर से लेकर चॉकलेट का भोग लगाने वाला मंदिर भी है।
 
लेकिन उत्तर प्रदेश राज्य के सहारनपुर में बेहट रोड पर स्थित एक हनुमान मंदिर की बात शायद सबसे हट कर है। यहां ऐसे लोगों को लाया जाता है जिनके सिर पर प्यार का भूत सवार होता है।

प्यार में पागल आशिकों का इलाज होता है यहां...
चौंकिए मत! यहां प्यार में पागल आशिकों का इलाज होता है, यह बात सोलहों आने सही है। यहां दूर-दूर से ऐसे लोगों को लाया जाता है, जिनके सिर पर इश्क का भूत सवार होता है।
 
आपने इश्क और प्यार की अजब-गजब कहानियां सुनी होंगी और आशिकों के पागल होने की बात भी सुनी होंगी। यहां वैसे ही लोगों को लाया जाता है। खबर है है कि कई परिवारों ने यहां आकर अपने सदस्यों के सिर से प्यार का भूत उतरवाया है।

शनिवार और मंगलवार को होती है विशेष पूजा...
सहारनपुर के बेहट रोड पर स्थित यह हनुमान मंदिर ज्यादा पुराना नहीं है। इसकी स्थापना लगभग आठ साल पहले हुई थी। यह मंदिर राजस्थान के मेहंदीपुर बालाजी के तर्ज पर तैयार की गई है। यहां काल भैरव और प्रेतराज सरकार के अतिरिक्त महाराज श्रीराम भी विराजमान हैं।
 
यहां पर हर शनिवार और मंगलवार को विशेष प्रकार पूजा और अनुष्ठान किए जाते हैं। पूजा के बाद मंदिर के पुजारी आशिक के परिवारों और आशिकों को भी कुछ उपाय बताते हैं। कहते हैं कि उन उपायों पर अमल करने लोगों की समस्या का समाधान हो जाता है।

युवराज ने सचिन के पैर छुए...वायरल हुआ इमेज़

By on 19:59

नई दिल्‍ली: मुंबई इंडियंस के ख़िलाफ़ युवराज सिंह अपने पुराने रंग में नज़र आए। युवी ने 23 गेंद पर 39 रन की अच्छी पारी खेली। उन्होंने इस दौरान 3 चौके और 2 शानदार छक्के जड़े। विशाखापत्तनम में मैच ख़त्म होने के बाद हैदराबाद और मुंबई टीम के खिलाड़ियों ने हाथ मिलाया। इस दौरान युवी सचिन को देखते ही उनके पैर छूने की कोशिश करने लगे, सचिन ने हसंते हुए युवराज को रोकने की कोशिश की। सचिन इस फोटो में युवराज को उठाते हुए दिख रहे हैं।


सचिन के पुत्र अर्जुन ने युवी को कहा 'थैंक्‍स'
मुंबई इंडियंस के मेंटॉर सचिन के पैर छूते हुए युवी की तस्वीर इंटरनेट पर तुरंत ही वायरल हो गई। सचिन और युवी दोनों के फ़ैन्स ने तस्वीर को खूब शेयर किया। इस फ़ोटो को कुछ ही देर में डेढ़ लाख से ज्यादा लोगों ने पसंद किया और साथ ही 1 हज़ार से ज्यादा कॉमेंट्स भी इस पर आए। इन कॉमेंट्स में सचिन तेंदुलकर के सुपुत्र अर्जुन तेंदुलकर का भी कॉमेंट शामिल है जो युवराज को सचिन के प्रति उनके सम्मान के लिए धन्यवाद कर रहे हैं।

युवी इससे पहले भी कई बार सचिन के पैर मैदान पर छू चुके हैं...
सचिन को क्रिकेट का भगवान का दर्ज़ा दे चुके युवी इससे पहले भी कई बार सचिन के पैर मैदान पर छू चुके हैं। पिछले साल आईपीएल में दिल्ली के लिए खेल रहे युवी ने सचिन के पैर छुए थे। इससे पहले एमसीसी और रेस्ट ऑफ़ वर्ल्ड के मैच में भी युवी ने सचिन के पैर छुए थे। युवराज के लिए सचिन क्या है ये बताने के लिए इतना ही काफ़ी है कि उनके मोबाइल में सचिन का नंबर 'गॉड' के नाम से सेव है।

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कैसे रिएक्ट करते हैं लोग, जब कोई 'उदास' होकर बेटी के जन्म की ख़बर दे...?

By on 19:54
नई दिल्ली: 

सोशल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म फेसबुक पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसका शीर्षक है - 'यू आर बिकॉज़ ऑफ हर' (You are because of her)... यह दरअसल दिल्ली के आरजे (रेडियो जॉकी) नावेद द्वारा किए गए एक सोशल एक्सपेरिमेंट का वीडियो है, जिसमें दिखाया गया है कि लोग उस समय कैसी प्रतिक्रिया देते है, जब कोई नया-नया पिता बना शख्स उन्हें बताता है कि उसकी पत्नी को बच्चा हुआ है... लेकिन यहां वीडियो में एक पेंच है...




48 घंटों से भी कम समय में 30 लाख से ज़्यादा बार देखे जा चुके इस वीडियो में आरजे नावेद को एक लिफ्ट में अलग-अलग अजनबियों के साथ दिखाया गया है... हर अजनबी की मौजूदगी में नावेद को फोन आता है, और उसे बताया जाता है कि वह एक बेटे का बाप बन गया है... बहुत उत्तेजित और खुश होकर वह यही ख़बर लिफ्ट के सहयात्री को भी देता है, 'बेटा हुआ है... बेटा हुआ है...' और हर बार लिफ्ट का हर सहयात्री उसे बधाई देता है...

लेकिन कुछ ही पल बाद आरजे नावेद को फिर एक फोन आता है, और उसे कुछ ख़बर दी जाती है, और तुरंत ही उसका 'उछलता-कूदता' मूड पूरी तरह बदलकर उदास हो जाता है... वह अपने सहयात्री से कहता है, "सॉरी, बेटी हुई है..."

आपको क्या लगता है, इस नई ख़बर के बाद नावेद के सहयात्रियों का प्रतिक्रिया कैसी रही होगी - वे बेटी होने पर नावेद को सांत्वना देंगे, या उसके उदास होने पर उसे खरी-खरी सुनाएंगे...?

खैर, हम आपको नावेद के लिफ्ट के सहयात्रियों की प्रतिक्रिया के बारे में बताएं, उससे बेहतर है कि आप खुद ही देख लें इस वीडियो को... बहरहाल, हम सिर्फ इतना बता सकते हैं कि यह एक सोशल एक्सपेरिमेंट था, जो कामयाब रहा, और अंत में दिल खुश कर देगा... वीडियो एक संदेश भी दे रहा है - अगर बेटियां न होतीं, अगर बहनें न होतीं, अगर बीवियां न होतीं, अगर मांएं न होतीं, तो आप भी न होते...

(विशेष नोट : वीडियो देखते वक्त विवेक का इस्तेमाल करें... कुछ हिस्सा बच्चों के देखने योग्य नहीं लग सकता है...)

Note This News From : http://khabar.ndtv.com/news/zara-hatke/how-people-react-when-a-distraught-man-tells-them-hes-just-had-a-daughter-1403017

रोंगटे खड़े कर देगा 'शराब पीकर गाड़ी न चलाएं' का संदेश देने वाला मुंबई पुलिस का वीडियो

By on 19:44


नई दिल्ली: शराब पीकर गाड़ी नहीं चलानी चाहिए, यह सलाह हमें चाहने वाला हर शख्स देता है... लेकिन सच्चाई यह है कि इसके बावजूद सड़कों पर नशे की वजह से हज़ारों की तादाद में लोगों की मौत होती है... अब मुंबई ट्रैफिक पुलिस ने एक नया तरीका ईजाद किया है, जो झकझोरकर रख देता है, और शराब पीकर गाड़ी नहीं तलाने को लेकर बहुत कड़ा संदेश पहुंचाता है...

मुंबई ट्रैफिक पुलिस ने अप्रैल के अंत में एक वीडियो फिल्म यूट्यूब पर अपलोड की, जिसका शीर्षक 'गिल्ट' (अपराधबोध) है... यह वीडियो एक व्यक्ति के अफसोस का एहसास होने की कहानी है...

वीडियो की शुरुआत एक ऐसे घर से होती है, जहां एक जवान व्यक्ति की मौत हो गई है, और उसकी शवयात्रा शुरू होने को है... उसकी विधवा पत्नी ज़ार-ज़ार रो रही है, और आसपास के सभी लोगों की आंखें भी पूरी तरह नम हैं... तभी वहां पहुंचता है एक और शख्स, जो मर चुके युवक का बॉस है, और काफी उदास लग रहा है...

इसके बाद बॉस को एक चेहरा नज़र आता है, जिसे देखकर वह काफी घबरा जाता है, और कहानी फ्लैशबैक में चली जाती है... अब फ्लैशबैक में बॉस अपने जन्मदिन का जश्न अपने साथ काम करने वाले लोगों के बीच मना रहा है, जहां शराब भी पी जा रही है... दावत में आए अपने एक जूनियर को शराब पीने के लिए उकसाते हुए बॉस बहुत खुश नज़र आ रहा है...



बस, वीडियो फिर उस व्यक्ति के घर पर पहुंच जाता है, जिसकी मौत हुई है... बॉस वहां एक कोने में दुबककर रोने लगता है, और बाहर निकल जाता है... लेकिन बाहर निकलते ही उसे वही चेहरा फिर नज़र आता है, अपनी कार के पास खड़ी हुआ... दरअसल यह चेहरा उसी लड़के का है, जिसकी शवयात्रा में शामिल होने बॉस पहुंचा है... यानी, वह भूत है...

यह भूत अपने बॉस को बहुत गुस्से में घूर-घूरकर देख रहा है, और बॉस को फिर दावत की बातें याद आती हैं... फिर दिखाई देता है, भूत की कनपटी से बहता खून, और बॉस सड़क पर घुटनों के बल बैठकर माफी मांगता रह जाता है... उसे एहसास हो रहा है कि अपनी दावत में शराब पिलाने के बाद उस साथी को गाड़ी चलाकर घर जाने देने की वजह से उसकी मौत के लिए वही ज़िम्मेदार है, और यही वह 'गिल्ट' है, जिसे मुंबई ट्रैफिक पुलिस महसूस करवाना चाहती है...

वीडियो के अंत में मुंबई ट्रैफिक पुलिस ने यही संदेश भी दिया है... 'ज़िम्मेदार दोस्त बनिए, पार्टी के बाद कैब का इंतज़ाम कीजिए'...

आइए, रोंगटे खड़े कर देने वाला यह वीडियो आप भी देखिए...




Note This News From: http://khabar.ndtv.com/news/zara-hatke/mumbai-polices-spine-chilling-video-to-give-out-the-message-dont-drink-and-drive-1402728

महाकवि कालिदास की संस्कृत कृति ‘रघुवंशम’ अब अंग्रेजी में

By on 19:41

नई दिल्ली: कालिदास की महानतम संस्कृत कृतियों में से एक ‘रघुवंशम’ अब अंग्रेजी में उपलब्ध है। इस पुस्तक में भगवान राम और उनके रघु वंश की कथा बयां की गई है। व्यापक रूप से पढ़े जाने वाले इस महाकाव्य का अंग्रेजी में अनुवाद पूर्व राजनयिक एएनडी हक्सर ने किया है।


भगवान राम और उनके पूर्वजों की कहानी
‘रघुवंशम : द लाइन ऑफ रघु’ पेंग्विन रैंडम हाउस ने प्रकाशित की है। इसमें रामायण और भगवान राम के पूर्वजों की कहानी और आज की तारीख में इसकी प्रासंगिकता के बारे में बताया गया है। कालिदास ने शास्त्रीय भाषा संस्कृत में इस महाकाव्य की रचना की। पुस्तक में भगवान राम के पूर्वजों और वंशजों का भी उल्लेख है।

रैंप पर गाय? देश में पहली बार देसी गाय सौंदर्य प्रतियोगिता, दो दिन चलेगी

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चंडीगढ़: भारतीय नस्ल की गाय के संरक्षण व संवर्धन के लिए हरियाणा सरकार महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित कर रही है। इस कार्यक्रम के तहत भारत की परंपरागत देसी नस्लों को प्रोत्साहन देने के लिए हरियाणा के रोहतक में देसी गौवंश सौंदर्य प्रतियोगिता शुरू हो चुकी है।

फैशन शो की तर्ज पर देसी गाय रैंप पर...
दो दिन चलने वाली इस प्रतियोगिता के दूसरे दिन यानि शनिवार सात मई को फैशन शो की तर्ज पर देसी गाय रैंप पर होंगी। हरियाणा के कृषि, पशुपालन एवं डेरी मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ की परिकल्पना पर शुरू इस प्रतियोगिता में हरियाणा के विभिन्न हिस्सों से 600 गौवंश कार्यक्रम स्थल पर पहुंच चुके हैं।

इस दो दिवसीय समारोह के दौरान 18 से ज्यादा प्रतियोगिताओं का आयोजन होगा। गौवंश के संरक्षण व संवर्धन को समर्पित सौंदर्य प्रतियोगिता में हरियाणा, साहीवाल, राठी, गिर, थारपारकर व बिलाही नस्लें शामिल हैं।

धनखड़ ने बताया कि इन गौवंश में 50 जवान सांडों सहित 40 बैलों के जोड़े, 40 बछड़े, 100 से ज्यादा बिना दूध वाली गाय और अन्य 18 स्पर्धाओं में गौवंश पहुंचे हैं। जिले के बहुअकबरपुर गांव में स्थित अंतरराष्ट्रीय भारतीय पशु विजन एवं अनुसंधान संस्थान के प्रांगण में पशुपालन एवं डेयरी विभाग हरियाणा द्वारा राज्य स्तरीय देसी गौवंश सौंदर्य प्रतियोगिता समारोह के दूसरे दिन आयोजित होने वाली इन प्रतियोगिताओं में हरियाणा की बेहतरीन गाय रैंप पर अपना 'जलवा' बिखेरेंगी।

5 गौ अभयारण्य बनाने का फैसला...
हरियाणा गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष भानीराम मंगला ने राज्य स्तरीय देसी गौवंश सौंदर्य प्रतियोगिता समारोह की शुक्रवार को शुरूआत की। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने देसी गायों के बचाव व संवर्धन के लिए प्रदेश में 5 गौ अभयारण्य बनाने का फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि पानीपत जिले के नैन गांव में 200 एकड़ में गौ अभयारण्य बनाया जा रहा है।

भानीराम मंगला ने कहा कि कुरूक्षेत्र में स्थित वीटा प्लांट में देसी गायों के दूध का प्रसंस्करण होगा और इसकी बिक्री वीटा ब्रांड से होगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री दुग्ध उत्पादक प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत दुग्ध उत्पादकों को दी जाने वाली सब्सिडी 4 रूपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 5 रूपये प्रति लीटर करने का निर्णय लिया है। देसी गायों की विभिन्न नस्लों का चलन पूरे देश में लोकप्रिय हो रहा है।
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कोमा में पड़े इंसान से बात करना मुमकिन होगा?

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कई बार चोट या किसी हादसे के चलते लोग कोमा में चले जाते हैं। उनकी सुनने, सोचने-समझने, बोलने और महसूस करते की ताकत खत्म हो जाती है। उनकी बस सांसें चलती रहती हैं। वो बस नाम के लिए जिंदा रहते हैं।

कुछ लोग ऐसी बीमारी के भी शिकार हो जाते हैं कि वो चल-फिर नहीं सकते। वो देख-सुन सकते हैं। समझ सकते हैं। महसूस कर सकते हैं। मगर अपने एहसास को बयां नहीं कर सकते। इस बीमारी को एएलएस या "एमायोट्रॉफिक लैटेरल स्क्लेरोसिस'' कहते हैं।

कुछ ऐसा ही हुआ जर्मनी की वालट्रॉट फैनरिक के साथ। उनके पति जोआचिम बताते हैं कि 2007 में जमीन पर गिरे सिक्के को उठाते वक्त वालट्रॉट के साथ जाने क्या हुआ कि वो गिर पड़ीं और फिर नहीं उठ सकीं। तीन महीने बाद उन्हें पता चला कि वालट्रॉट को "एमायोट्रॉफिक लैटेरल स्क्लेरोसिस'' या एएलएस है।

दोनों की जिंदगी तो तबाह सी हो गई। ये हादसा मई 2007 में पेश आया था। सितंबर के आते आते वालट्रॉट के सांस लेने के सिस्टम ने काम करना बंद कर दिया था।

जोआचिम कहते हैं कि जब उन्हें ये पता चला तो वो सारा दिन अस्पताल में रोते फिरते रहे। वो समझ नहीं पा रहे थे कि आखिर इतनी जल्दी जिंदगी कैसे बदल गई। अभी कुछ महीने पहले फैनरिक दंपति हाथों में हाथ डाले बागों की सैर किया करते थे।

2010 में डॉक्टरों ने बताया कि वालट्रॉट पूरी तरह से कोमा में चली गई हैं। उसी हाल में वो आज तक हैं।

ऐसा नहीं कि वालट्रॉट को कुछ महसूस नहीं होता। उन्हें कमरे की गर्मी सर्दी का एहसास होता है। एक जगह पर बरसों से पड़े रहने का दर्द भी होता है। वो लोगों की बातें भी सुन सकती हैं। मगर उनका दिमाग क्या सोच रहा है? ये अब से कुछ दिनों पहले तक किसी को पता नहीं चलता था।

जर्मनी की ट्यूबिन्जेन यूनिवर्सिटी के न्यूरोसाइंटिस्ट नील्स बीरबॉमर ने अपना पूरा करियर ऐसे लोगों की बीमारी समझने में लगा दिया है जिन्हें ऐसी बीमारी है। जो महसूस तो करते हैं। मगर अपने एहसास बता नहीं पाते। नील्स को लगता है कि अब उन्हें इस अंधेरे रास्ते में रौशनी दिखने लगी है।


एफएमआरआई तकनीक से वैज्ञानिक ऐसे लोगों के दिमाग की हरकतें पढ़ सकते हैं जो कोमा में सुन्न पड़े होते हैं। ऐसे लोगों को ट्रेनिंग देकर हां या ना करने का काम भी कराया जा सकता है। कनाडा के एड्रियन ओवेन ने ये तरीका खोजकर कोमा में पड़े लोगों से बातचीत का रास्ता खोला था।

दिक्कत ये है कि एफएमआरआई कराना बहुत परेशानी वाला और खर्चीला काम है। इसी वजह से जर्मन वैज्ञानिक नील्स और उनके साथी, ऐसे लोगों से बात करने का नया तरीका खोजने में लगे हैं।

अस्सी के दशक से ही ऐसी तकनीक मौजूद है जिससे इंसान के दिमाग के उस हिस्से का पता लगाया जा सकता है जहां पर जबानों के और काबिलियत के संदेश पढ़े और समझे जाते हैं। इस तकनीक की मदद से अल्जाइमर बीमारी की वजह समझने में भी मदद मिली है।

नील्स ने अपने तमाम तजुर्बों से पाया कि जब कोमा में पड़ा इंसान हां या ना कहना चाहता है तो दोनों ही सूरतों में दिमाग में खून की दौड़ान की रफ्तार एकदम अलग होती है।

नील्स ने एक ब्रेन कंप्यूटर बनाया। इसकी मदद से उन्होंने वालट्रॉट से उनके पति की आवाज में कई सवाल पूछे। जैसे कि, क्या लंदन इंग्लैंड की राजधानी है? क्या पेरिस जर्मनी की राजधानी है? क्या तुम्हारा नाम वालट्रॉट है?

इस दौरान नील्स का बनाया ब्रेन कंप्यूटर, वालट्रॉट के दिमाग की हरकतों पर नजर रखता था। करीब पच्चीस सेकेंड के बाद वालट्रॉट के दिमाग की हरकतों से उनके सवालों के जवाब मिल जाते थे। धीरे-धीरे, नील्स को वालट्रॉट से ज्यादातर सवालों के जवाब मिलने लगे।

नील्स बताते हैं कि कुछ सवालों के जवाब आपको पता होते हैं। तो आप चाहें न चाहें, आपका दिमाग वो सवाल सुनते ही प्रतिक्रिया देता है। जवाब देता है। हां या ना वाले जवाब देते वक्त दिमाग अलग तरह से रिएक्ट करता है।


इसके लिए बहुत ज्यादा दिमाग लगाने की जरूरत नहीं होती। जब वालट्रॉट से ये सवाल किए जाते हैं तो नील्स का ब्रेन कंप्यूटर ये पता लगा सकता है कि वालट्रॉट का दिमाग सोया है या जाग रहा है।

हालांकि नील्स को इस बात की तसल्ली होनी बाकी थी कि वो वालट्रॉट का दिमाग सही तरीके से पढ़ पा रहे हैं। इस बात का पता लगाना टेढ़ी खीर है। क्योंकि दिमाग के भीतर हंगामा सा बरपा रहता है। एक साथ बहुत से काम होते रहते हैं। जब किसी मरीज का दिमाग सवालों के जवाब सोच रहा होता है। उसी वक्त दिमाग लाखों और काम भी कर रहा होता है। उन लाखों कामों में से अपने सवाल का जवाब तलाशना बड़ी चुनौती है।

इसके लिए नील्स ने कंप्यूटर के जरिए वालट्रॉट से सरल सवाल कई बार पूछे। जब ये तय हो गया कि वालट्रॉट ने कम से कम सत्तर फीसद बार इन सवालों के सही जवाब दिए, तब तक ब्रेन कंप्यूटर पर वो जवाब दर्ज नहीं किए गए।

नील्स कहते हैं कि ये जरूरी है कि मरीज को ब्रेन कंप्यूटर से बात करने की आदत हो जाए। इसके बाद भी आपको इस बात की तसल्ली करनी होगी कि आप अपने ही सवालों के जवाब मरीज के दिमाग से पा रहे हैं।

नील्स, अपना तजुर्बा बताते हैं। एक बार उन्होंने वालट्रॉट से पूछा कि क्या आप घर पर हैं। इसका जवाब हर बार हां में मिला। फिर नील्स ने कुछ मुश्किल सवाल किए। मसलन, क्या आप तकलीफ में हैं? क्या आप अपने पति को देखना चाहती हैं? क्या आप जीना चाहती हैं?

कोमा में जाने वाले तमाम मरीजों की तरह वालट्रॉट भी वेंटिलेटर पर हैं। उन्हें नली के जरिए खाना खिलाया जाता है।

डॉक्टर मानते हैं कि उन्हें अब किसी चीज का स्वाद नहीं आता। लेकिन वालट्रॉट के पति जोआचिम अपनी पत्नी का बहुत खयाल रखते हैं। वो अभी भी साथ-साथ छुट्टी पर जाते हैं। जब भी उनकी पसंदीदा गायिका हेलेन फिशर का शो होता है। दोनों साथ जाते हैं। जोआचिम अपनी बीवी को व्हीलचेयर पर ले जाते हैं, शो दिखाने के लिए।

नील्स कहते हैं कि एक सवाल से ये पता चलता है कि अपने हालात से मरीज परेशान होकर मरना चाहता है या फिर जीने की तमन्ना उनके अंदर है।
अगर मरीज से ये पूछा जाए कि क्या आप खुद को अपने परिवार पर बोझ समझते हैं? अगर मरीज का जवाब हां है तो इसका मतलब ये है कि मरीज अब नहीं जीना चाहता। जो लोग हमेशा जीने की चाहत जताते हैं उनके लिए उनके परिजन बेहतर माहौल बनाए रखते हैं। हमेशा उनसे प्यार जताते हैं। उनकी अहमियत का उन्हें एहसास कराते हैं।

नील्स बताते हैं कि उनके सवालों के जो जवाब मिले हैं उनसे ये पता चलता है कि वालट्रॉट जीना चाहती हैं। उनके पति कहते हैं कि, ''हमारा रिश्ता अभी बहुत मजबूत है''।

दिक्कत ये है कि जोआचिम अपनी पत्नी से तीन महीने में सिर्फ एक बार बात कर पाते हैं, जब नील्स और उनकी टीम घर आती है। अब जोआचिम खुद एक ब्रेन कंप्यूटर खरीदना चाहते हैं। ताकि वो अपनी पत्नी से जब जी चाहे तब बात कर सकें। लेकिन वो बहुत महंगा है और बीमे की रकम से नहीं खरीदा जा सकता।

वहीं नील्स के पास वालट्रॉट जैसे पांच और मरीज हैं। वो उम्मीद जता रहे हैं कि एक दिन उनका तजुर्बा ऐसे मरीजों से बातचीत करने में का आएगा। हालांकि अभी तो उनके रिसर्च की ये शुरुआत भर है। ऐसे ही रिसर्च करने वाले दूसरे लोगों ने नील्स के तजुर्बों पर सवाल भी उठाए हैं।

फिर कुछ लोग नैतिकता का सवाल उठाते हैं। कोमा में पड़े मरीज के दिमाग पर इतना जोर डालना सही है या नहीं। कि उनसे जिंदगी और मौत के सवाल किए जाएं।

नील्स कहते हैं कि कोमा में पड़े मरीजों की दिमागी तरंगों की रफ्तार आम इंसानों जैसी ही यानी पांच हर्त्ज की होती है, जब वो सोते रहते हैं। इसका मतलब ये कि लकवे के शिकार इंसान पर लंबे वक्त पर कुछ-कुछ सो जाने जैसा असर होता है।

वहीं कोमा में पड़े मरीजों को तमाम एहसास अच्छे से होते रहते हैं। ऐसे में अगर वो अपनी बात किसी भी तरीके से बता पाते हैं तो वो मरीज और तीमारदार, दोनों के लिए अच्छा होगा।

वैसे कुछ जानकार कहते हैं कि कोमा में पड़ा हर मरीज अपने एहसास ब्रेन कंप्यूटर को बता पाएगा, ये कहना जरा मुश्किल है। कई बार उनके जवाब गलत भी समझे जा सकते हैं। इससे उनकी तकलीफ बढ़ने का डर है।

वहीं नील्स को उम्मीद है कि आगे चलकर वो ऐसी तकनीक विकसित कर लेंगे, जिससे कोमा में पड़े इंसान से बात करना मुमकिन हो सकेगा।

फिलहाल तो ब्रेन कंप्यूटर उनके दिमाग की सिर्फ हां या ना को समझ सकता है। इसमें भी सत्तर फीसद ही कामयाबी होती है। अगर यही कामयाबी अस्सी फीसद हो जाए तो कंप्यूटर, मरीज के दिमाग से निकलने वाले शब्द भी पकड़ सकेगा। मगर ये अभी दूर की कौड़ी है। नील्स कहते हैं कि अगर वो ऐसा करने में कामयाब हुए तो सुकून से मर सकेंगे।
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फांसी की सजा पाने वालों में अधिकतर गरीब और कम पढ़े लिखे

By on 10:20
  • सेंटर ऑन द डेथ पेनाल्टी की रिपोर्ट में हुआ खुलासा
  • फांसी की सजा पाने वालों में 84 फीसदी का था पहला अपराध

अपने जघन्य अपराध के लिए फांसी की सजा पाने वालों की संख्या सबसे अधिक उत्तर प्रदेश में है, जबकि बिहार दूसरे स्थान पर है। वैसे आबादी के अनुपात में देखें तो देश की राजधानी दिल्ली पहले पायदान पर है। इस बात का खुलासा सेंटर ऑन द डेथ पेनाल्टी की रिपोर्ट में हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार फांसी की सजा पाने वालों में 84 फीसदी ऐसे हैं, जिन्होंने पहली बार अपराध किया। इनमें अधिकतर गरीब और कम पढ़े लिखे हैं तथा उनका कोई आपराधिक पृष्ठभूमि भी नहीं रहा है।

20 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश की जेलों में बंद फांसी की सजा पाए 373 कैदियों और उनके परिवारवालों से बातचीत के आधार पर तैयार रिपोर्ट में कहा गया है कि फांसी की सजा पाए 74.1 फीसदी कैदी आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के हैं। इनमें 76 फीसदी अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति, ओबीसी या धार्मिक अल्पसंख्यक समूह से हैं।

इन कैदियों में 73 अपने परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे, जबकि 59 परिवार में कमाने वाले मुख्य सदस्य थे। रिपोर्ट के मुताबिक, फांसी की सजा पाने वाले कैदियों में 23 फीसदी ऐसे हैं जो कभी स्कूल नहीं गए, जबिक 61.6 फीसदी ने माध्यमिक तक की शिक्षा पूरी नहीं की। फांसी की सजा पाए लोगों में 34 फीसदी ओबीसी हैं, जबकि 24.5 फीसदी एससी/एसटी व 24 फीसदी सामान्य वर्ग के हैं। 20.7 फीसदी धार्मिक अल्पसंख्यक समूह के हैं। आतंकी गतिविधियों में फांसी की सजा पाने वालों में करीब 93.5 फीसदी अनुसूचित जाति या धार्मिक अल्पसंख्यक समुदाय से हैं। आतंकी मामलों में फांसी की सजा पाए 31 लोगों में 19 (61.3 फीसदी) अल्पसंख्यक हैं। रिपोर्ट के अनुसार फांसी की सजा पाने वालों में 12 महिलाएं हैं। 

उत्तर प्रदेश में कुल 79 लोगों को फांसी की सजा मिली है। इनमें से 62 लोगों को हत्या के मामले में फांसी की सजा हुई है। दिल्ली में फांसी की सजा पाने वालों की संख्या 30 है, जबकि जम्मू एवं कश्मीर और उत्तराखंड में यह संख्या क्रमश: छह और चार है। रिपोर्ट के मुताबिक, फांसी की सजा पाए 373 कैदियों में से दिहाड़ी मजदूर (खेतिहर और गैर खेतिहर) की संख्या 170 है, जबकि 17 बेरोजगार,  छह छात्र और तीन धर्म से जुड़े काम करने वाले हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, फांसी की सजा पाने वालों में 60 फीसदी हत्या, जबकि  20 फीसदी यौन अपराधों में दोषी ठहराए गए हैं। 373 कैदियों में से 270 का मामला विभिन्न हाईकोर्टों में लंबित है, जबकि 52 कैदियों का मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। 30 की दया याचिका लंबित है, जबकि 21 की दया याचिका खारिज हो चुकी है। इन कैदियों में से 18 ने दावा किया है कि घटना के वक्त वे नाबालिग थे।
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'मेरा भी दिल टूटा है, मुझे भी काम नहीं मिला,'

By on 10:18
हाल ही में मुंबई में एक जानी मानी टीवी अभिनेत्री प्रत्युषा बैनर्जी ने आत्महत्या कर ली। प्रत्युषा की मौत की वजह अभी भी स्पष्ट नहीं है और न ही मैं इस बारे में ज़्यादा जानती हूं, लेकिन पैसे और काम की तंगी को भी इसकी एक वजह माना जा रहा है।


ग्लैमर इंडस्ट्री में काम की कमी, हमेशा खुश रहने का दबाव और सबसे अच्छा दिखने की होड, कलाकारों पर एक खास दबाव पैदा कर देता है। अभिनेत्रियों पर यह दबाव और ज्यादा होता है। प्रत्युषा अकेली नहीं है, पिछले साल दीपिका पादुकोण के भी अवसाद में रहने की बात सामने आई थी।

इस इंडस्ट्री में कई लोग हैं, जिन्हें मैंने डिप्रेस होते देखा है। मैं भी ऐसे समय से गुजरी हूं, जब मुझे लगा कि मुझे जीवित नहीं रहना चाहिए। मेरा भी दिल टूटा है, मुझे भी काम नहीं मिला है। लेकिन मैंने जिंदगी का एक ही उसूल माना है कि आज जो चीज बहुत दुःख दे रही है, पांच दिन, पांच हफ्ते या पांच साल के बाद उतना दुःख नहीं देगी।

यही आजकल के युवाओं को समझने की जरूरत है, क्योंकि भारत में हम तय नहीं कर पा रहे हैं कि हम मॉर्डन रहें या ट्रेडिशनल ही रहें। हम अंग्रेजी बोलकर और जींस पहनकर, खुद को मॉर्डन मान लेते हैं, लेकिन लोग क्या कहेंगे, हमें इसकी भी चिंता होती है।

आज भी एक लडकी को पूरी तरह औरत बनने के लिए शादी करके मां बनना जरूरी है। यही सोच है, जो हमारे युवा समाज को फिर वहीं ला देती है, जहां से निकल आने की हम बाते करते हैं।
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पत्नी को 'ऊंची जाति' वालों ने नहीं लेने दिया कुएं से पानी, पति ने खोद दिया कुआं

By on 09:33
सूखे का मार से परेशान महाराष्ट्र में दलित ने जातिवाद को अपने अंदाज में बुरी तरह से जवाब दिया है। महाराष्ट्र के वाशिम जिले के कलाांबेश्वर में रहने वाले बापुराव ताजणे की पत्नी को जब ऊंची जाति के पड़ोसियों ने कुएं से पानी नहीं लेने दिया तो उसने अपनी पत्नी के लिए कुआं खोद दिया और 40 दिनों के अंदर ही उससे पानी निकलने लगा।

ताजणे ने जो कुआं खोदा उसका इस्तेमाल आज सभी दलित कर रहे हैं। ताजणे 8 घंटे मजदूरी करने के बाद करीब 6 घंटे रोज कुआं खोदने में लगाते थे। ताजणे द्वारा कुआं खोदने पर उनके पड़ोसी और परिजन मजाक उड़ाते थे। लोगों का मानना था कि ऐसे पथरीले इलाके में पानी कहां मिलेगा वो भी तब जबकि क्षेत्र के आसपास के तीन कुएं और बोरवेल सूख चुके थे।

बता दें कि कुआं खोदने के लिए करीब पांच लोगों की आवश्यकता होती है लेकिन ताजणे ने यह काम कर दिखाया। अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया को ताजणे ने बताया कि मैं गांव में लड़ाई झगड़ा नहीं चाहता लेकिन उन्होंने ऐसा इसलिए किया क्योंकि हम गरीब दलित हैं। जिस दिन यह घटना हुई थी, मैं बहुत दुखी हुआ था। ताजणे ने यह भी कहा कि पत्नी को जब पानी नही दिया गया तो मैंने किसी से कुछ भी न मांगने की कसम खाई और मालेगांव से कुआं खोदने का सामान लेकर आए और फिर खुदाई शुरु कर दी। मैंने ऊपरवाले का शुक्रिया अदा करता हूं कि मुझे सफलता मिली।

ताजणे की पत्नी संगीता का कहना है कि मैंने अपने पति की कोई मदद नहीं की जब तक कुएं से पानी नहीं निकल गया।

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महिलाओं के वजन का सौंदर्य से होता है गहरा नाता, जानिए कैसे?

By on 09:31
नई दिल्ली: लिंग, बीएमआई और सौंदर्य की धारणा के बीच संबंध का आकलन करते एक नए अध्ययन से ज्ञात हुआ है कि वजन का सौंदर्य से गहरा नाता है और महिलाएं इस मामले में सबसे कठोर निर्णायक होती हैं और उन्हें इस पैमाने पर सबसे अधिक कठोरता से परखा भी जाता है।

अध्ययन से ज्ञात हुआ है महिलाएं अधिक बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) वाले पुरुषों और महिलाओं को कम आकर्षक मानती हैं। इतना ही नहीं वे अन्य महिलाओं को सौंदर्य के पैमाने पर वजन को लेकर कठोरता से मापती हैं।
इसके विपरीत पुरुष अन्य पुरुषों को ज्यादा वजन के आधार पर नकारात्मक रूप से नहीं आंकते। लेकिन साथ ही पुरुष ज्यादा वजन वाली महिलाओं को कम आकर्षक मानते हैं। ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ र्से की प्रोफेसर सोनिया ओरेफाइस के मुताबिक यह पहला अध्ययन है जिसमें महिलाओं और पुरुषों दोनों के दृष्टिकोण से बीएमआई के साथ सौंदर्य के संबंध को परखा गया है।
अध्ययन में शरीर के आकार और सौंदर्य और उसके साथ जुड़ी वेतन असमानता पर भी रोशनी डाली गई है। यह अध्ययन पत्रिका ‘इकोनोमिक्स एंड ह्यूमन बायोलोजी’ में प्रकाशित हुआ है।

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भारत माता की जय' पर रामदेव का औवेसी पर निशाना- कहा 'लाखों के गर्दन काट सकते हैं, लेकिन...

By on 05:49

रोहतक: हरियाणा में आरएसएस द्वारा आयोजित सद्भावना रैली में जनता को संबोधित करते हुए बाबा रामदेव ने एमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी पर निशाना साधते हुए कहा कि कानून है वरना एक की क्या लाखों की गर्दन काट सकते हैं। गौरतलब है कि कुछ दिन पहले औवेसी ने संघ प्रमुख मोहन भागवत को जवाब देते हुए कहा था कि कोई उनकी गर्दन पर छुरी भी रख दे, तब भी वह 'भारत माता की जय' के नारे नहीं लगाएंगे।

अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक रोहतक में हुई इस सद्भावना रैली में बाबा रामदेव ने भारत माता की जय नारे पर चल रहे विवाद पर कहा 'कोई आदमी टोपी पहनकर खड़ा हो जाता है, बोलता है भारत माता की जय नहीं बोलूंगा, चाहे मेरी गर्दन काट दो। अरे इस देश में कानून हैं, नहीं तो तेरी एक की क्या, हम तो लाखों की गर्दन काट सकते हैं।' रामदेव ने यह भी कहा कि 'कोई ऐसे खड़ा हो कर बोल दे, इसलिए इन हुड़दंगियों के हौंसले बुलंद हो जाते हैं। हम इस देश के कानून और संविधान का सम्मान करते हैं, नहीं तो कोई भारत माता का अपमान करे, एक नहीं, हम हज़ारों लाखों के शीष कलम करने का सामर्थ्य रखते हैं।'

'भारत माता की जय धर्म के खिलाफ कैसे'
हाल ही में इस्लामिक तालीम के प्रमुख केंद्र दारुल उलूम ने एक फतवा जारी करते हुए कहा था कि भारत माता की जय का नारा लगाना इस्लाम धर्म में उचित नहीं है। इस पर भी निशाना साधते हुए रामदेव ने कहा 'मुझे आश्चर्य होता है, कुछ संस्थाएं बनी हुई हैं, कहती हैं भारता माता की जय बोलना हमारे धर्म के खिलाफ है। यह कैसे हो सकता है। अपनी मातृभूमि को गौरव देना किसी मज़हब के खिलाफ नहीं और अगर कोई मज़हब यह कहता है कि अपनी मातृभूमि को गौरव मत दो, तो वह मज़हब भी देश के हित में नहीं है।

बता दें कि पिछले महीने हरियाणा में जाट आंदोलन के दौरान हुई हिंसा से काफी जान-माल का नुकसान हुआ था। राज्य में शांति और भाई चारे को बनाए रखने के उद्देश्य से आयोजित की गई इस रैली में हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल आचार्य देवव्रत समेत अभिनेता रणदीप हुड्डा हरियाणा की कई हस्तियां शामिल थीं।

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